विस्तृत उत्तर
महाभारत के 'अनुशासन पर्व' (अध्याय १४) में महर्षि उपमन्यु शिवलिंग की उपासना का तात्विक रहस्य समझाते हैं। वे बताते हैं कि संपूर्ण चराचर जगत 'भग' (स्त्रीलिंग चिह्न) और 'लिंग' (पुल्लिंग चिह्न) के चिह्न से युक्त है, जिसका अर्थ है कि यह संपूर्ण सृष्टि केवल ब्रह्मा से नहीं, बल्कि शिव और पार्वती के कारण-स्वरूप (प्रकृति और पुरुष) से ही उत्पन्न हुई है।
देवी पार्वती के कारण-स्वरूप भाव से संसार की समस्त स्त्रियाँ उत्पन्न हुई हैं और भगवान शिव से समस्त पुरुष। ब्रह्मा, विष्णु और इंद्र सहित सभी देवता शिवलिंग (जो शिव और शक्ति का संयुक्त प्रतीक है) की उपासना करते हैं।
यह संवाद पार्वती को संपूर्ण सृष्टि की 'जननी' और मूल कारण के रूप में स्थापित करता है।





