विस्तृत उत्तर
महाभारत में एकादशी श्राद्ध से कुप्य वस्तुओं की संपत्ति और ब्रह्मवर्चस्वी पुत्रों का फल बताया गया है।
महाभारत में एकादशी श्राद्ध फल क्या है को संदर्भ सहित समझें
महाभारत में एकादशी श्राद्ध फल क्या है का सबसे सीधा सार यह है: संपत्ति और तेजस्वी पुत्र।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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सुधर्मा सभा 'काम-गामिनी' क्यों कहलाती है?
सुधर्मा सभा को काम-गामिनी इसलिए कहते हैं क्योंकि यह स्थिर संरचना नहीं है — यह इच्छानुसार आकाश में तीव्र या मंद गति से विचरण कर सकती है।
इन्द्र की सुधर्मा सभा में कौन से ऋषि आते हैं?
सुधर्मा सभा में महर्षि पराशर, दुर्वासा, याज्ञवल्क्य, व्यासदेव, हरिश्चन्द्र, विश्वकर्मा, तुम्बुरु, बृहस्पति, शुक्राचार्य और भृगु-सप्तर्षि आते हैं।
महाभारत में लिंग-भग तत्त्व का क्या वर्णन है?
महाभारत अनुशासन पर्व (14वाँ अध्याय): समस्त सृष्टि शिव (लिंग) और पार्वती (भग) के प्रकृति-पुरुष से उत्पन्न। पार्वती से समस्त स्त्रियाँ, शिव से समस्त पुरुष। ब्रह्मा-विष्णु-इंद्र सभी शिवलिंग (शिव+शक्ति का संयुक्त प्रतीक) की उपासना करते हैं।
महाभारत अनुशासन पर्व में शिव-पार्वती का क्या संवाद है?
महाभारत अनुशासन पर्व (143वाँ अध्याय): पार्वती ने शिव से स्त्री-धर्म और गृहस्थ जीवन के नियम पूछे। शिव ने बताया: स्त्री का सबसे बड़ा धर्म = 'पातिव्रत्य' और करुणा। सावित्री ने इसी से यमराज से सत्यवान के प्राण वापस लिए।
वासवी शक्ति क्या है?
वासवी शक्ति महाभारत का एक अमोघ दिव्यास्त्र था जिसे केवल एक बार चलाया जा सकता था और जिसका निशाना कभी नहीं चूकता था। यह कर्ण के पास था और इंद्र ने इसे दिया था।
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