विस्तृत उत्तर
रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण में शिव और पार्वती का संवाद ही संपूर्ण कथा का मूल आधार है। पूर्व जन्म में सती के रूप में, उन्होंने त्रेता युग में दंडकारण्य में भगवान राम की परीक्षा ली थी। सती ने माता सीता का रूप धारण किया था, जिस कारण शिव ने उन्हें पत्नी रूप में त्याग दिया था।
पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लेने के पश्चात, भगवान शिव उन्हें 'राम कथा' विस्तार पूर्वक सुनाते हैं। एक प्रसंग में शिव पार्वती को श्मशान में ले जाकर 'राम नाम' की महिमा समझाते हैं। शिव कहते हैं कि कलियुग में मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल उपाय भगवान राम का नाम ही है ('श्रीराम राम रामेति...')।
काशी में मृत्यु को प्राप्त होने वाले जीवों के कान में भगवान शिव 'तारक मंत्र' (राम नाम) ही फूँकते हैं, जिससे उन्हें मोक्ष मिलता है। माता पार्वती एक आदर्श और जिज्ञासु श्रोता के रूप में शिव से गूढ़ आध्यात्मिक प्रश्न पूछती हैं, जिससे राम-तत्त्व का उद्घाटन होता है। एक मान्यता यह भी है कि पार्वती जी ने ही सीता जी को समझाया था कि भगवान राम करुणानिधान हैं।





