विस्तृत उत्तर
जलंधर की अजेयता के दो प्रमुख कारण थे।
पहला कारण — शिव-तेज: जलंधर शिव के तेज से उत्पन्न था। इसलिए वह शक्ति में देवताओं से भी श्रेष्ठ था। शिव के तेज से जन्मा होने के कारण शिव के अलावा कोई और उसे पराजित नहीं कर सकता था।
दूसरा और प्रमुख कारण — वृंदा का सतीत्व: यही जलंधर की वास्तविक अजेयता का कवच था। उसकी पत्नी वृंदा अत्यंत पतिव्रता स्त्री थी। देवी भागवत पुराण और शिव पुराण के अनुसार वृंदा के पतिव्रत धर्म की दिव्य शक्ति से जलंधर न मारा जा सकता था, न पराजित हो सकता था।
इसीलिए — देवता और शिव दोनों मिलकर भी युद्ध में जलंधर को नहीं जीत पाए जब तक वृंदा का सतीत्व अखंड था। यही कारण था कि जलंधर का वध करने के लिए पहले वृंदा के सतीत्व को नष्ट करना अनिवार्य था।





