विस्तृत उत्तर
यदि साधक ने संकल्प में 'अखण्ड दीप' प्रज्वलित करने का प्रण लिया है, तो उस दीपक को पूरे नौ दिन और नौ रात क्षण भर के लिए भी बुझने नहीं देना चाहिए।
दीपक अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जो अनुष्ठान का साक्षी है। इसमें घृत (घी) या तेल निरंतर डालते रहना चाहिए और वायु से इसकी रक्षा करनी चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि यदि घर में कलश और अखण्ड ज्योति स्थापित है, तो उस घर को एक क्षण के लिए भी खाली या सूना छोड़कर नहीं जाना चाहिए।





