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भक्ति📜 भक्ति रसामृत सिंधु (रूप गोस्वामी), नवधा भक्ति1 मिनट पठन

भक्ति में सख्य भाव क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

ईश्वर=मित्र। अर्जुन-कृष्ण (गीता), सुदामा (पोहा→महल), गोपबाल। 'दोस्त से सब कहूंगा — खुशी/दुख/शिकायत।' 5 भाव: शांत→दास्य→**सख्य**→वात्सल्य→माधुर्य।

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विस्तृत उत्तर

सख्य भाव = ईश्वर = मित्र:

क्या है: भगवान = मेरा सखा/मित्र — न भय, न दूरी — प्रेम + समानता + विश्वास।

उदाहरण

  • अर्जुन-कृष्ण: गीता = सखा संवाद। 'हे कृष्ण!' = मित्र भाव।
  • सुदामा-कृष्ण: बचपन मित्र → पोहा → महल = मैत्री।
  • गोप-कृष्ण: ग्वालबाल = कृष्ण संग खेलना → सख्य भक्ति।

भाव: 'भगवान = मेरे दोस्त। उनसे सब कहूंगा — खुशी/दुख/शिकायत। वो सुनेंगे — दोस्त हैं!'।

5 भक्ति भाव: शांत → दास्यसख्य → वात्सल्य → माधुर्य (उत्तरोत्तर गहन)।

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शास्त्रीय स्रोत
भक्ति रसामृत सिंधु (रूप गोस्वामी), नवधा भक्ति
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