विस्तृत उत्तर
सख्य भाव = ईश्वर = मित्र:
क्या है: भगवान = मेरा सखा/मित्र — न भय, न दूरी — प्रेम + समानता + विश्वास।
उदाहरण
- ▸अर्जुन-कृष्ण: गीता = सखा संवाद। 'हे कृष्ण!' = मित्र भाव।
- ▸सुदामा-कृष्ण: बचपन मित्र → पोहा → महल = मैत्री।
- ▸गोप-कृष्ण: ग्वालबाल = कृष्ण संग खेलना → सख्य भक्ति।
भाव: 'भगवान = मेरे दोस्त। उनसे सब कहूंगा — खुशी/दुख/शिकायत। वो सुनेंगे — दोस्त हैं!'।
5 भक्ति भाव: शांत → दास्य → सख्य → वात्सल्य → माधुर्य (उत्तरोत्तर गहन)।





