परिचय और स्वरूपमाँ भुवनेश्वरी का स्वरूप कैसा है?माँ भुवनेश्वरी स्वरूप: सौम्य और प्रकाशमान। तीन नेत्र। कांति = उदयकालीन सूर्य जैसी। हाथों में पाश और अंकुश। वरद और अभय मुद्रा। मस्तक पर चंद्रकला का किरीट। मंद मुस्कान।#भुवनेश्वरी स्वरूप#तीन नेत्र#पाश अंकुश
परिचय और स्वरूपमाँ त्रिपुर भैरवी का स्वरूप कैसा है?त्रिपुर भैरवी स्वरूप: सहस्र सूर्यों जैसी कांति, रक्तवर्ण रेशमी वस्त्र, मुण्डमाला, रक्त-लिप्त पयोधर। हाथों में जपमाला-विद्या-अभय-वर मुद्रा। तीन नेत्र, कमलवत मुख, चंद्रकला+रत्न मुकुट, मंद मुस्कान। 4 भुजाएँ।
मंत्र का स्वरूप और अर्थ'त्र्यम्बकम्' का क्या अर्थ है?'त्र्यम्बकम्' = 'त्रि' (तीन) + 'अम्बकम्' (नेत्र) = तीन नेत्रों वाले शिव। तीन नेत्र: सूर्य (ऊर्जा), चंद्र (शांति), अग्नि (ज्ञान) के प्रतीक। शिव तीनों कालों के ज्ञाता और नियंत्रक हैं।#त्र्यम्बकम्#तीन नेत्र#शिव