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तीन नेत्र से जुड़े सभी प्रश्न(3)

तीन नेत्र पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

परिचय और स्वरूप

माँ भुवनेश्वरी का स्वरूप कैसा है?

माँ भुवनेश्वरी स्वरूप: सौम्य और प्रकाशमान। तीन नेत्र। कांति = उदयकालीन सूर्य जैसी। हाथों में पाश और अंकुश। वरद और अभय मुद्रा। मस्तक पर चंद्रकला का किरीट। मंद मुस्कान।

#भुवनेश्वरी स्वरूप#तीन नेत्र#पाश अंकुश
परिचय और स्वरूप

माँ त्रिपुर भैरवी का स्वरूप कैसा है?

त्रिपुर भैरवी स्वरूप: सहस्र सूर्यों जैसी कांति, रक्तवर्ण रेशमी वस्त्र, मुण्डमाला, रक्त-लिप्त पयोधर। हाथों में जपमाला-विद्या-अभय-वर मुद्रा। तीन नेत्र, कमलवत मुख, चंद्रकला+रत्न मुकुट, मंद मुस्कान। 4 भुजाएँ।

#त्रिपुर भैरवी स्वरूप#तीन नेत्र#मुण्डमाला
मंत्र का स्वरूप और अर्थ

'त्र्यम्बकम्' का क्या अर्थ है?

'त्र्यम्बकम्' = 'त्रि' (तीन) + 'अम्बकम्' (नेत्र) = तीन नेत्रों वाले शिव। तीन नेत्र: सूर्य (ऊर्जा), चंद्र (शांति), अग्नि (ज्ञान) के प्रतीक। शिव तीनों कालों के ज्ञाता और नियंत्रक हैं।

#त्र्यम्बकम्#तीन नेत्र#शिव
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