विस्तृत उत्तर
तंत्र शास्त्र में 'औषधि सिद्धि' का अर्थ है — मंत्र शक्ति, तांत्रिक विधि या साधना के बल से किसी औषधि (जड़ी-बूटी, रसायन, भस्म आदि) में असाधारण प्रभावकारिता उत्पन्न करना।
औषधि सिद्धि का सिद्धांत
तंत्र का मानना है कि प्रत्येक औषधि में अपनी एक सूक्ष्म शक्ति होती है। मंत्र जप, ध्यान, और विशिष्ट तांत्रिक विधि से इस शक्ति को जागृत और बहुगुणित किया जा सकता है।
औषधि सिद्धि के प्रकार
1मंत्र-सिद्ध औषधि
औषधि को विशिष्ट मंत्र से अभिमंत्रित करना। उदाहरण: किसी जड़ी-बूटी पर 108 या 1008 बार मंत्र जप कर उसे रोगी को देना।
2रसायन सिद्धि
रसार्णव: पारद, गंधक, अभ्रक आदि खनिजों को तांत्रिक विधि से शोधित-संस्कारित करना। अष्टसंस्कार — पारद के आठ संस्कार — रसायन सिद्धि का प्रमुख उदाहरण।
3वनौषधि सिद्धि
विशिष्ट नक्षत्र, तिथि, और मुहूर्त में जड़ी-बूटी एकत्र करना, मंत्र जपते हुए उखाड़ना, और विशेष विधि से तैयार करना।
4भस्म सिद्धि
धातुओं या रत्नों को तांत्रिक विधि से भस्म बनाना। इसमें मंत्र जप, हवन, और विशिष्ट अग्नि संस्कार शामिल हैं।
विधि (सामान्य)
- ▸शुभ मुहूर्त में औषधि संग्रह
- ▸शुद्धिकरण (पंचगव्य/गोमूत्र से)
- ▸ताम्र/रजत पात्र में रखकर मंत्र जप
- ▸निश्चित संख्या में जप (108/1008/10000)
- ▸हवन से अभिषेक
- ▸गोपनीय रूप से प्रयोग
अथर्ववेद का औषधि सूक्त
या ओषधीः पूर्वा जाता देवेभ्यस्त्रियुगं पुरा।' — जो औषधियाँ देवताओं से भी पूर्व उत्पन्न हुईं। वेद में औषधियों को देवता तुल्य माना गया है और उनकी शक्ति जागृत करने के लिए मंत्र बताए गए हैं।
सावधानी
औषधि सिद्धि केवल अनुभवी और गुरु-दीक्षित साधक ही करें। गलत मंत्र या अशुद्ध विधि से औषधि हानिकारक भी हो सकती है। आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।