विस्तृत उत्तर
घटजोनी' मुनि अगस्त्यजी हैं। 'घट' का अर्थ है घड़ा और 'जोनी' (योनि) का अर्थ है जन्म — अर्थात् घड़ेसे उत्पन्न होनेवाले। पौराणिक कथा के अनुसार मुनि अगस्त्यजी का जन्म एक कलश (घड़े) से हुआ था, इसलिये उन्हें 'कुम्भज' या 'घटजोनी' कहते हैं।
पूरी चौपाई है — 'बालमीक नारद घटजोनी। निज निज मुखनि कही निज होनी। जलचर थलचर नभचर नाना। जे जड़ चेतन जीव जहाना॥'
इसका अर्थ — वाल्मीकिजी, नारदजी और अगस्त्यजीने अपने-अपने मुखोंसे अपनी होनी (जीवनका वृत्तान्त) कही है। जलमें रहनेवाले, जमीनपर चलनेवाले और आकाशमें विचरनेवाले नाना प्रकारके जड़-चेतन जितने जीव इस जगतमें हैं (उन सबने सत्संगका प्रभाव अनुभव किया है)।





