विस्तृत उत्तर
तुलसीदासजी ने रामचरितमानस की रचना विक्रम संवत् 1631 (1574 ईस्वी) में शुरू की।
चौपाई — 'सादर सिवहि नाइ अब माथा। बरनउँ बिसद राम गुन गाथा। संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा॥'
इसका अर्थ — अब मैं आदरपूर्वक श्रीशिवजीको सिर नवाकर श्रीरामचन्द्रजीके गुणोंकी निर्मल कथा कहता हूँ। श्रीहरिके चरणोंपर सिर रखकर संवत् 1631 में इस कथाका आरम्भ करता हूँ।
सोरह सै एकतीसा' = सोलह सौ इकतीस = 1631 विक्रम संवत्।
इसकी समाप्ति संवत् 1633 के मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष में राम विवाह के दिन हुई। कुल रचना काल 2 वर्ष 7 महीने 26 दिन था।





