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तुलसीदास से जुड़े सभी प्रश्न(14)

तुलसीदास पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 14 प्रश्न उपलब्ध हैं।

पूजा विधि एवं कर्मकांड

राम जी की पूजा में सबसे बड़ी गलती कौन सी है जो भक्त करते हैं

राम-पूजा की सबसे बड़ी गलती — तुलसीदास के अनुसार — भाव-रहित, आडंबरपूर्ण पूजा। राम प्रसन्न तभी होते हैं जब मन सच्चा हो, आचरण सत्य हो। पूजा करके झूठ बोलना और हनुमान की उपेक्षा भी प्रमुख गलतियाँ हैं।

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गौरी वंदना मंत्र

गौरी वंदना मंत्र किस ग्रंथ से लिया गया है?

गौरी वंदना मंत्र गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस के बालकाण्ड में सीता के गौरी वंदना प्रसंग से लिया गया है।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी' — किसने कहा और अर्थ?

तुलसीदासजी — मंगलाचरण। सम्पूर्ण जगत सीताराममय जानकर प्रणाम। सबसे प्रसिद्ध दोहा।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस किसने लिखी?

गोस्वामी तुलसीदासजी ने — 'रामचरितमानस कबि तुलसी।' संवत् 1631-1633 (1574-1576 ई.) में रचना। अयोध्या में शुरू, काशी में समर्पित। हिन्दी साहित्य के महानतम कवि।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

बालकाण्ड का अन्तिम सन्देश क्या है?

रामचरित की अपार महिमा — जो इस कथा को कहे-गाये वे सदा सुख पावें। 'चरित सिंधु गिरिजा रमन बेद न पावहिं पारु' — शिवजी का चरित्र समुद्र-सा अपार, वेद भी पार न पायें। सन्देश — विनम्रता, भक्ति और रामचरित महिमा।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस किस भाषा में लिखी गई?

अवधी भाषा में। तुलसीदासजी ने श्लोक 7 में कहा — 'भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति' अर्थात् रघुनाथजी की कथा को मनोहर भाषारचना में विस्तृत करता है। कथा है कि शिवजी ने स्वप्न में जनभाषा में लिखने का आदेश दिया।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस को पूरा होने में कितना समय लगा?

2 वर्ष 7 महीने 26 दिन। आरम्भ — संवत् 1631 चैत्र शुक्ल नवमी (रामनवमी) अयोध्या में। समाप्ति — संवत् 1633 मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष, राम विवाह के दिन। अन्त में काशी में भगवान विश्वनाथ के समक्ष समर्पित किया गया।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

रामचरितमानस की रचना किस स्थान पर शुरू हुई?

रामचरितमानस की रचना अयोध्या (अवधपुरी) में शुरू हुई — 'अवधपुरीं यह चरित प्रकासा।' तुलसीदासजी ने श्रीराम की जन्मभूमि को ही रचना का आरम्भ स्थान चुना। कुछ भाग काशी में भी लिखा गया।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

तुलसीदासजी ने रामचरितमानस की रचना कब शुरू की — कौन सा संवत?

संवत् 1631 (1574 ईस्वी) में। तुलसीदासजी ने लिखा — 'संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा।' अर्थात् संवत् 1631 में श्रीहरि के चरणों पर सिर रखकर कथा आरम्भ करता हूँ।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

बालकाण्ड में तुलसीदासजी ने अपने को क्या कहकर विनम्रता प्रकट की है?

तुलसीदासजी ने स्वयं को 'मति अति नीच' (अत्यन्त नीची बुद्धि वाला), 'मन मति रंक' (मन-बुद्धि से कंगाल), और काव्य ज्ञान से रहित बताकर विनम्रता प्रकट की। कहा कि बुद्धि कंगाल है पर मनोरथ राजा है।

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भक्ति एवं आध्यात्म

भक्तिकाल के प्रमुख संत कौन-कौन थे?

भक्तिकाल के प्रमुख संत — निर्गुण: कबीरदास, रैदास, गुरु नानक, दादू दयाल। सगुण राम भक्ति: तुलसीदास। सगुण कृष्ण भक्ति: सूरदास, मीराबाई, नरसी मेहता, चैतन्य महाप्रभु, रसखान। इस युग को हिंदी साहित्य का स्वर्णयुग कहा जाता है।

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भक्ति साहित्य

तुलसीदास की चौपाई में क्या शक्ति है

तुलसीदास की चौपाइयों में मंत्र-शक्ति, लयात्मक छंद, जीवन-दर्शन और राम-नाम का तेज एकसाथ है। सुंदरकाण्ड का नित्य पाठ संकट-नाशक और मन को शांत करने वाला माना जाता है।

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हिंदू दर्शन

रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण में क्या अंतर

वाल्मीकि = संस्कृत, प्राचीन, राम मर्यादा पुरुषोत्तम (मानवीय आदर्श)। मानस = अवधी, 16वीं सदी, राम परब्रह्म (भक्ति प्रधान)। मुख्य अंतर: लक्ष्मण रेखा/पुष्प वाटिका मानस में (वाल्मीकि में नहीं), सीता निर्वासन मानस में नहीं, माया सीता तुलसीदास की मौलिक व्याख्या। दोनों पूरक।

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रामायण परिचय

रामायण किसने लिखी?

वाल्मीकि रामायण महर्षि वाल्मीकि द्वारा संस्कृत में रचित है — 24,000 श्लोक, 7 कांड। यह 'आदिकाव्य' है। रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास द्वारा अवधी में 16वीं शताब्दी में रचित है — उत्तर भारत में सर्वाधिक प्रचलित। 'रामो विग्रहवान् धर्मः' — राम धर्म का मूर्त स्वरूप हैं।

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