विस्तृत उत्तर
भगवान राम की पूजा में भक्तों से होने वाली सबसे बड़ी और सबसे सामान्य गलतियाँ:
सबसे बड़ी गलती — केवल बाहरी आडंबर, भाव-रहित पूजा। तुलसीदास जी ने स्पष्ट कहा है — माला और मंत्र से, तिलक और छापे से राम प्रसन्न नहीं होते जब तक मन सच्चा न हो। 'कच्चे मन वाला व्यर्थ ही नाचता रहता है।' भाव के बिना विधि शव के समान है।
दूसरी गलती — पूजा करना और जीवन में असत्य व्यवहार करना। राम-पूजा करके झूठ बोलना, किसी का हक मारना — यह सबसे बड़ा पूजा-विरोध है। राम का नाम और राम के विरुद्ध आचरण एक साथ नहीं चलते।
तीसरी गलती — रामचरितमानस न पढ़ना। राम-भक्त होकर रामायण से दूरी रखना उनकी उपेक्षा है।
चौथी गलती — हनुमान जी की उपेक्षा। राम जी हनुमान के बिना अधूरे हैं। राम की पूजा करने वाले को हनुमान की भी पूजा अनिवार्य रूप से करनी चाहिए।
पाँचवीं गलती — राम को केवल पूजा-पात्र मानना, जीवन-आदर्श न मानना। राम को मंदिर में छोड़ देना और जीवन में उनकी मर्यादाएँ न अपनाना — यह भक्ति नहीं, औपचारिकता है।





