विस्तृत उत्तर
रामचरितमानस अवधी भाषा में लिखी गई है। अवधी उत्तर भारत की जनभाषा थी जिसे आम लोग बोलते और समझते थे।
स्वयं तुलसीदासजी ने बालकाण्ड के श्लोक 7 में लिखा — 'स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति॥'
इसका अर्थ — अनेक पुराण, वेद और शास्त्रोंसे सम्मत तथा जो रामायणमें वर्णित है और कुछ अन्यत्रसे भी उपलब्ध श्रीरघुनाथजीकी कथाको तुलसीदास अपने अन्तःकरणके सुखके लिये अत्यन्त मनोहर भाषारचनामें विस्तृत करता है।
कथा प्रचलित है कि भगवान शिवजी ने स्वप्न में तुलसीदासजी को संस्कृत छोड़कर जनभाषा (अवधी) में लिखने का आदेश दिया ताकि आम लोग भी रामकथा समझ सकें। इसीलिये रामचरितमानस को 'तुलसीकृत रामायण' भी कहा जाता है।





