विस्तृत उत्तर
रामचरितमानस की रचना अयोध्या (अवधपुरी) में शुरू हुई।
चौपाई — 'नौमी भौम बार मधुमासा। अवधपुरीं यह चरित प्रकासा॥'
इसका अर्थ — चैत्र मासकी नवमी तिथि मंगलवारको श्रीअयोध्यापुरीमें यह चरित्र प्रकाशित हुआ।
तुलसीदासजी ने अयोध्या को ही रचना का आरम्भ स्थान चुना क्योंकि अयोध्या भगवान श्रीरामचन्द्रजी की जन्मभूमि है। बालकाण्ड में अयोध्या की महिमा बताते हुए कहा — 'राम धामदा पुरी सुहावनि। लोक समस्त बिदित अति पावनि। चारि खानि जग जीव अपारा। अवध तजें तनु नहिं संसारा॥'
अर्थ — यह शोभायमान अयोध्यापुरी श्रीरामचन्द्रजीके परमधामकी देनेवाली है, सब लोकोंमें प्रसिद्ध है और अत्यन्त पवित्र है। जो कोई भी अयोध्याजीमें शरीर छोड़ते हैं वे फिर संसारमें नहीं आते।
हालाँकि रामचरितमानस का कुछ अंश काशी (वाराणसी) में भी लिखा गया और अन्त में काशी में ही भगवान विश्वनाथ और माता अन्नपूर्णा के समक्ष समर्पित किया गया।





