विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड में दूतों के विशिष्ट नाम का उल्लेख नहीं है। राजा जनक ने विश्वामित्रजी की सलाह पर शीघ्र अयोध्या में दूत भेजे। दूतों ने राजा दशरथ को धनुष भंग, जयमाला और विवाह की सारी बातें सुनाईं और बारात लेकर आने का निमन्त्रण दिया।
दूत अयोध्या पहुँचकर पहले गुरु वसिष्ठजी से मिले, फिर राजा दशरथ को संदेश सुनाया। दशरथ अत्यन्त प्रसन्न हुए और वसिष्ठजी की आज्ञा से बारात की तैयारी शुरू करवाई।





