विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड के अन्त में तुलसीदासजी ने रामचरित की महिमा बताई — जो स्त्री-पुरुष शिव-पार्वती के विवाह की इस कथा को कहते और गाते हैं, वे कल्याणके कार्यों और विवाह आदि मंगलोंमें सर्वदा सुख पावेंगे।
छन्द — 'यह उमा संभु बिबाहु जे नर नारि कहहिं जे गावहीं। कल्यान काज बिबाह मंगल सर्बदा सुखु पावहीं॥'
दोहा — 'चरित सिंधु गिरिजा रमन बेद न पावहिं पारु। बरनै तुलसीदासु किमि अति मतिमंद गवाँरु' — गिरिजापति (शिवजी) का चरित्र समुद्रके समान अपार है, उसका पार वेद भी नहीं पाते — तब मन्दबुद्धि तुलसीदास उसका वर्णन कैसे करे!
सार — बालकाण्ड का अन्तिम सन्देश विनम्रता, भक्ति और रामचरित की अपार महिमा है।





