विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड में तुलसीदासजी ने कहा कि रामकथा अनन्त है — उसकी कोई सीमा नहीं।
चौपाई — 'नाना भाँति राम अवतारा। रामायन सत कोटि अपारा॥'
इसका अर्थ — नाना प्रकारसे श्रीरामचन्द्रजीके अवतार हुए हैं और सौ करोड़ तथा अपार रामायण हैं।
आगे दोहे में कहा — 'राम अनंत अनंत गुन अमित कथा बिस्तार। सुनि आचरजु न मानिहहिं जिन्ह के बिमल बिचार॥'
अर्थ — श्रीरामचन्द्रजी अनन्त हैं, उनके गुण भी अनन्त हैं और उनकी कथाओंका विस्तार भी असीम है। अतएव जिनके विचार निर्मल हैं, वे इस कथाको सुनकर आश्चर्य नहीं मानेंगे।
इसका तात्पर्य — भगवान राम अनन्त अवतार लेते हैं, हर कल्प में अलग-अलग प्रकार से उनकी लीला होती है, इसीलिये उनकी कथाएँ भी सौ करोड़ से अधिक — अपार (अनगिनत) हैं।


