विस्तृत उत्तर
इस चौपाई का अर्थ है — कल्पभेदके अनुसार श्रीहरिके सुन्दर चरित्रोंको मुनीश्वरोंने अनेकों प्रकारसे गाया है।
आगे कहा — 'करिअ न संसय अस उर आनी। सुनिअ कथा सादर रति मानी॥' अर्थ — हृदयमें ऐसा विचारकर संदेह न कीजिये और आदरसहित प्रेमसे इस कथाको सुनिये।
इसका तात्पर्य — हिन्दू दर्शन में 'कल्प' ब्रह्माजी के एक दिन (4.32 अरब वर्ष) को कहते हैं। हर कल्प में सृष्टि नयी होती है और भगवान नये-नये प्रकार से अवतार लेते हैं। इसीलिये हर कल्प की रामकथा थोड़ी भिन्न होती है — वाल्मीकि रामायण, अध्यात्म रामायण, तुलसीकृत रामायण आदि सब अलग-अलग कल्पों की कथाएँ हैं।
तुलसीदासजी कहते हैं — इसमें संदेह मत करो, प्रेमपूर्वक सुनो।