विस्तृत उत्तर
यह सोरठा भगवान शंकरजी (शिवजी) की स्तुति है।
पूरी सोरठा है — 'कुंद इंदु सम देह उमा रमन करुना अयन। जाहि दीन पर नेह करउ कृपा मर्दन मयन॥'
इसका अर्थ — जिनका कुन्दके पुष्प और चन्द्रमाके समान (गौर) शरीर है, जो पार्वतीजीके प्रियतम और दया के धाम हैं और जिनका दीनोंपर स्नेह है, वे कामदेवका मर्दन करनेवाले (शंकरजी) मुझपर कृपा करें।
इसमें शिवजी के चार विशेषण हैं — कुन्द-चन्द्र समान गौर शरीर, उमा (पार्वती) के पति, करुणा के धाम, और कामदेव को भस्म करने वाले (मर्दन मयन)।





