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सोरठा से जुड़े सभी प्रश्न(4)

सोरठा पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

रामचरितमानस — बालकाण्ड

'जलु पय सरिस बिकाइ देखहु प्रीति कि रीति भलि' — इस सोरठा का क्या अर्थ है?

अर्थ — प्रेम की सुन्दर रीति देखो कि जल भी दूध के साथ मिलकर दूध के भाव बिकता है। लेकिन कपटरूपी खटाई पड़ते ही दूध फट जाता है और पानी अलग हो जाता है। तात्पर्य — सतीजी के कपट (सीता रूप) ने शिवजी के प्रेम-बन्धन को तोड़ दिया।

#बालकाण्ड#सोरठा#प्रीति रीति
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'कुंद इंदु सम देह उमा रमन करुना अयन' — इसमें किसकी स्तुति है?

यह भगवान शंकरजी (शिवजी) की स्तुति है। अर्थ — जिनका कुन्द और चन्द्रमा समान गौर शरीर है, जो पार्वतीजी के प्रियतम और दीनों पर दया करने वाले हैं, वे कामदेव को भस्म करने वाले शंकरजी मुझपर कृपा करें।

#बालकाण्ड#शिव स्तुति#मंगलाचरण
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन' — यह किसका वर्णन है?

यह भगवान विष्णु (नारायण) का वर्णन है। अर्थ — जो नील कमल समान श्यामवर्ण हैं, लाल कमल समान नेत्र हैं और सदा क्षीरसागर में शयन करते हैं, वे भगवान मेरे हृदय में निवास करें।

#बालकाण्ड#भगवान विष्णु#मंगलाचरण
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन' — यह किसकी स्तुति है?

यह सोरठा श्रीगणेशजी की स्तुति है। इसमें गणेशजी को 'गन नायक' (गणों के स्वामी), 'करिबर बदन' (हाथी के मुखवाले) और 'बुद्धि रासि सुभ गुन सदन' (बुद्धि और शुभ गुणों के धाम) कहा गया है।

#बालकाण्ड#गणेश वन्दना#सोरठा
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