विस्तृत उत्तर
रामचरितमानस में 'मानस' शब्द का दो अर्थ है:
- 1मानस = मन। भगवान शिवजी ने इस कथा को अपने मन (मानस) में रचा था। बालकाण्ड में कहा — 'रचि महेस निज मानस राखा। पाइ सुसमउ सिवा सन भाषा। ताते रामचरितमानस बर। धरेउ नाम हियँ हेरि हरषि हर॥'
इसका अर्थ — श्रीमहादेवजीने इसको रचकर अपने मनमें रखा था और सुअवसर पाकर पार्वतीजीसे कहा। इसीसे शिवजीने इसको अपने हृदयमें देखकर और प्रसन्न होकर इसका सुन्दर 'रामचरितमानस' नाम रखा।
- 1मानस = सरोवर। तुलसीदासजी ने इसकी तुलना मानसरोवर (पवित्र सरोवर) से भी की — 'रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा॥' अर्थ — इसका नाम रामचरितमानस है, जिसके कानोंसे सुनते ही शान्ति मिलती है।
इस प्रकार 'रामचरितमानस' का शाब्दिक अर्थ है — 'राम के चरित्र का मानस (मन/सरोवर)' — अर्थात् वह पवित्र सरोवर जिसमें भगवान राम का चरित्र भरा हुआ है।





