विस्तृत उत्तर
यह दोहा भगवान श्रीरामचन्द्रजी (कलियुग के सब पापों को जला डालनेवाले दयालु भगवान) की कृपा का वर्णन करता है।
पूरा दोहा है — 'मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन॥'
इसका अर्थ — जिनकी कृपासे गूँगा बहुत सुन्दर बोलनेवाला हो जाता है और लँगड़ा-लूला दुर्गम पहाड़पर चढ़ जाता है, वे कलियुगके सब पापोंको जला डालनेवाले दयालु (भगवान) मुझपर द्रवित हों (दया करें)।
यह दोहा बताता है कि भगवान की कृपा से असम्भव भी सम्भव हो जाता है — बोलने में असमर्थ व्यक्ति वाक्पटु बन जाता है और चलने में असमर्थ व्यक्ति कठिन पर्वत भी चढ़ लेता है।





