रामचरितमानस — बालकाण्डरामचरितमानस में मुख्य छन्द कौन से हैं?मुख्य छन्द — (1) चौपाई (सर्वाधिक, कथा वाहक), (2) दोहा (सार-संक्षेप), (3) सोरठा (दोहे का उल्टा), (4) छन्द (विशेष अवसरों पर, गेय), (5) श्लोक (संस्कृत, मंगलाचरण)। चौपाई-दोहा मिलकर कथा चलती है।#बालकाण्ड#छन्द प्रकार#चौपाई
रामचरितमानस — बालकाण्डशिवजी ने श्रीरामजी को देखकर कैसे प्रणाम किया?शिवजी ने 'सच्चिदानन्द परमधाम' कहकर हृदय से प्रणाम किया। सतीजी से कहा — 'सोइ मम इष्टदेव रघुबीरा' — ये वही मेरे इष्टदेव श्रीरघुवीर हैं जिनकी कथा अगस्त्य ऋषि ने गाई और जिनकी सेवा ज्ञानी मुनि सदा करते हैं।
रामचरितमानस — बालकाण्ड'सकल कामना हीन जे राम भगति रस लीन' — ऐसे भक्तों की क्या विशेषता बताई?ऐसे निष्काम भक्तों ने रामनाम के प्रेमरूपी अमृत-सरोवर में अपने मन को मछली बना रखा है — जैसे मछली जल से अलग नहीं हो सकती, वैसे ही वे क्षणभर भी नाम-प्रेम से अलग नहीं होते। वे भोग और मोक्ष दोनों की कामना से रहित हैं।#बालकाण्ड#निष्काम भक्ति#नाम प्रेम
रामचरितमानस — बालकाण्ड'राम नाम मनि दीप धरु जीह देहरीं द्वार' — इसमें राम नाम की तुलना किससे है?राम नाम की तुलना मणि-दीपक से की गई है। अर्थ — यदि भीतर-बाहर दोनों ओर उजाला चाहते हो तो मुखरूपी द्वार की जीभरूपी देहली पर रामनामरूपी मणि-दीपक रख दो।#बालकाण्ड#राम नाम#मणि दीपक
रामचरितमानस — बालकाण्डतुलसीदासजी ने संतों की तुलना किस फूल से की है?संतों की तुलना अंजलि (हथेलियों) में रखे शुभ सुमन (सुन्दर फूलों) से की है। जैसे फूल दोनों हाथों को समान सुगन्ध देते हैं, वैसे ही संत सबके प्रति बिना भेदभाव के समान भाव रखते हैं।#बालकाण्ड#संत#सुमन उपमा
रामचरितमानस — बालकाण्ड'बंदउँ संत समान चित हित अनहित नहिं कोइ' — संतों की क्या विशेषता बताई गई?संतों की विशेषता बताई — उनका चित्त समान है, कोई हितैषी नहीं कोई अहितैषी नहीं। जैसे हथेलियों में रखे फूल दोनों हाथों को समान सुगन्ध देते हैं, वैसे ही संत सबसे समान भाव रखते हैं।#बालकाण्ड#संत लक्षण#समदर्शी
रामचरितमानस — बालकाण्ड'बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि' — इसमें गुरु को क्या कहा गया है?इस दोहे में गुरु को 'कृपा सिंधु' (कृपा का समुद्र) और 'नररूप हरि' (मनुष्य रूप में साक्षात् भगवान विष्णु) कहा गया है। गुरु के वचनों को महामोह रूपी अन्धकार नष्ट करने वाली सूर्य-किरणें बताया गया।#बालकाण्ड#गुरु वन्दना#नररूप हरि
रामचरितमानस — बालकाण्ड'मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन' — इस दोहे में किसकी कृपा का वर्णन है?यह दोहा भगवान श्रीराम की कृपा का वर्णन करता है। अर्थ है — जिनकी कृपा से गूँगा सुन्दर बोलने लगता है और लँगड़ा दुर्गम पहाड़ चढ़ जाता है, वे कलियुग के पाप जलाने वाले दयालु भगवान मुझपर दया करें।#बालकाण्ड#भगवान कृपा#मंगलाचरण