विस्तृत उत्तर
तुलसीदासजी ने संतों की तुलना अंजलि (दोनों हथेलियों) में रखे हुए शुभ सुमन (सुन्दर फूलों) से की है।
दोहा — 'बंदउँ संत समान चित हित अनहित नहिं कोइ। अंजलि गत सुभ सुमन जिमि सम सुगंध कर दोइ॥'
अर्थ — जैसे अंजलिमें रखे हुए शुभ सुमन (सुन्दर फूल) दोनों हाथोंको समान रूपसे सुगन्ध देते हैं, वैसे ही संत सबके प्रति समान भाव रखते हैं।
इस उपमा की सुन्दरता यह है कि फूल को यह ज्ञान नहीं होता कि कौन सा हाथ दायाँ है और कौन सा बायाँ — वह दोनों को बिना भेदभाव के सुगन्ध देता है। ठीक उसी प्रकार संत भी मित्र-शत्रु, ऊँच-नीच, अमीर-गरीब सबको समान दृष्टि से देखते हैं और सबका कल्याण करते हैं।


