विस्तृत उत्तर
इस दोहे में संतों की सबसे बड़ी विशेषता बताई गई है — समदर्शिता। संत सबको समान दृष्टि से देखते हैं, उनके लिये कोई हितकारी नहीं और कोई अहितकारी नहीं।
पूरा दोहा — 'बंदउँ संत समान चित हित अनहित नहिं कोइ। अंजलि गत सुभ सुमन जिमि सम सुगंध कर दोइ॥'
इसका अर्थ — मैं उन संतोंकी वन्दना करता हूँ जिनका चित्त समान है, जिनके लिये कोई हितैषी नहीं और कोई अहितैषी नहीं (अर्थात् वे सबसे समान भाव रखते हैं)। जैसे अंजलि (दोनों हथेलियों) में रखे हुए सुन्दर फूल दोनों हाथों को समान रूपसे सुगन्ध देते हैं (कोई भेदभाव नहीं करते, न दाहिने हाथ को अधिक न बायें को कम), वैसे ही संत सबके साथ समान व्यवहार करते हैं।





