विस्तृत उत्तर
रामचरितमानस में कथा-वक्ता और श्रोता की चार जोड़ियाँ (संवाद) हैं। तुलसीदासजी ने इन्हें मानस सरोवर के चार मनोहर घाट कहा।
दोहा — 'सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि बिचारि। तेइ एहि पावन सुभग सर घाट मनोहर चारि॥'
चार संवाद-जोड़ियाँ:
- 1शिव-पार्वती संवाद — मूल कथा (शिवजी वक्ता, पार्वतीजी श्रोता)
- 2काकभुशुण्डि-गरुड़ संवाद — (भुशुण्डिजी वक्ता, गरुड़जी श्रोता)
- 3याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद — (याज्ञवल्क्यजी वक्ता, भरद्वाजजी श्रोता)
- 4तुलसीदास-संत संवाद — (तुलसीदासजी वक्ता, संत-श्रोता)
इन चारों संवाद-धाराओं के माध्यम से रामकथा कही-सुनी जाती है।





