का सरल उत्तर
चार जोड़ियाँ (चार घाट) — (1) शिव-पार्वती, (2) काकभुशुण्डि-गरुड़, (3) याज्ञवल्क्य-भरद्वाज, (4) तुलसीदास-संत। 'सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि बिचारि। तेइ एहि पावन सुभग सर घाट मनोहर चारि॥'
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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