विस्तृत उत्तर
इसका अर्थ — श्रीरामचन्द्रजीके विवाहकी जैसी विधि (रीति) वर्णन की गयी, उसी रीतिसे सब राजकुमार (भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न) भी विवाहे गये।
तात्पर्य — चारों भाइयों का विवाह एक ही वेदविधि से, एक ही मण्डप में, एक ही अवसर पर सम्पन्न हुआ। जिस प्रकार राम-सीता का पाणिग्रहण हुआ, उसी विधि से लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-माण्डवी और शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति का विवाह भी हुआ।
आगे — 'कहि न जाइ कछु दाइज भूरी। रहा कनक मनि मंडपु पूरी' — दहेजकी अधिकता कुछ कही नहीं जाती; सारा मंडप सोने और मणियोंसे भर गया।





