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चौपाई अर्थ से जुड़े सभी प्रश्न(5)

चौपाई अर्थ पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 5 प्रश्न उपलब्ध हैं।

रामचरितमानस — बालकाण्ड

'जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी। सकल कुअँर ब्याहे तेहिं करनी' — इसका अर्थ?

अर्थ — रामजी के विवाह की जो विधि बताई, उसी रीति से सब राजकुमार (भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न) भी विवाहे गये। चारों विवाह एक ही वेदविधि, एक मण्डप, एक अवसर पर। दहेज से मण्डप सोने-मणियों से भरा।

#बालकाण्ड#चौपाई अर्थ#चारों विवाह
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाई। राम देत नहिं बनइ गोसाई' — इसका अर्थ?

अर्थ — सब पुत्र मुझे प्राणों समान प्यारे हैं, राम को देना सम्भव नहीं। दशरथ ने कहा — पृथ्वी, गौ, धन, प्राण सब दे दूँगा पर राम नहीं दे सकता। कहाँ भयानक राक्षस, कहाँ मेरा सुकुमार पुत्र।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

'जब जब होइ धरम कै हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी' — इसका क्या अर्थ है?

अर्थ — जब-जब धर्म का ह्रास होता है और नीच अभिमानी राक्षस बढ़ जाते हैं, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। चार कारण — धर्म हानि, असुरों का बढ़ना, अन्याय, और ब्राह्मण-गौ-देवता-पृथ्वी का कष्ट। यह गीता के 'यदा यदा हि धर्मस्य' के समान सिद्धान्त है।

#बालकाण्ड#धर्म हानि#अवतार
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'ब्रह्मचर्ज ब्रत संजम नाना। धीरज धरम ग्यान बिग्याना। सदाचार जप जोग बिरागा। सभय बिबेक कटकु सबु भागा' — इसका क्या अर्थ है?

अर्थ — ब्रह्मचर्य, संयम, धीरज, धर्म, ज्ञान, सदाचार, जप, योग, वैराग्य — विवेक की यह सारी सेना डरकर भाग गयी। कामदेव के प्रभाव से सृष्टि का सारा विवेक और संयम नष्ट हो गया। केवल शिवजी अप्रभावित रहे।

#बालकाण्ड#कामदेव#विवेक सेना
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटिहि कलेसू' — इसका अर्थ?

अर्थ — ऐसा तप करो जिससे शिवजी मिल जायें, दूसरे किसी उपाय से यह कष्ट नहीं मिटेगा। नारदजी ने स्पष्ट किया कि शिवजी प्राप्ति का एकमात्र मार्ग कठोर तपस्या है, कोई और उपाय काम नहीं करेगा।

#बालकाण्ड#चौपाई अर्थ#तपस्या
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