विस्तृत उत्तर
इस चौपाई का अर्थ — सभी पुत्र मुझे प्राणोंके समान प्यारे हैं; उनमें भी हे प्रभो (गोसाई)! रामको तो किसी प्रकार भी देते नहीं बनता।
आगे दशरथ ने कहा — 'कहँ निसिचर अति घोर कठोरा। कहँ सुंदर सुत परम किसोरा' — कहाँ अत्यन्त भयानक राक्षस और कहाँ मेरा सुकुमार किशोर पुत्र!
दशरथ ने विश्वामित्रजी से कहा — 'मागहु भूमि धेनु धन कोसा। सर्बसु देउँ आजु सहरोसा। देह प्रान तें प्रिय कछु नाहीं। सोउ मुनि देउँ निमिष एक माहीं' — आप पृथ्वी, गौ, धन और खजाना माँग लीजिये, आज बड़े हर्षके साथ अपना सर्वस्व दे दूँगा। देह और प्राणसे अधिक प्यारा कुछ भी नहीं होता, मैं उसे भी एक पलमें दे दूँगा — पर राम नहीं दे सकता।





