'सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाई। राम देत नहिं बनइ गोसाई' — इसका अर्थ?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
अर्थ — सब पुत्र मुझे प्राणों समान प्यारे हैं, राम को देना सम्भव नहीं। दशरथ ने कहा — पृथ्वी, गौ, धन, प्राण सब दे दूँगा पर राम नहीं दे सकता। कहाँ भयानक राक्षस, कहाँ मेरा सुकुमार पुत्र।
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रामचरितमानस — बालकाण्ड
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