विस्तृत उत्तर
इस चौपाई का अर्थ है — ऐसा तप करो जिससे महेश्वर (शिवजी) मिल जायें। दूसरे किसी उपायसे यह कष्ट (क्लेश) नहीं मिटेगा।
यह नारदजी ने हिमवान से कहा — यदि तुम्हें कन्यापर प्रेम है तो जाकर उसे ऐसी शिक्षा दो कि वह ऐसा तप करे जिससे शिवजी मिल जायें।
इसमें दो बातें स्पष्ट हैं:
- 1शिवजी को पाने का एकमात्र मार्ग तपस्या है — 'करै सो तपु' (वैसा तप करे)
- 2कोई भी अन्य उपाय (मंत्र, तंत्र, याचना, दान आदि) काम नहीं करेगा — 'आन उपायँ न मिटिहि कलेसू' (दूसरे उपाय से कष्ट नहीं मिटेगा)
इस एक चौपाई ने पार्वतीजी के जीवन की दिशा बदल दी — इसके बाद उन्होंने वन में जाकर अत्यन्त कठोर तपस्या आरम्भ की।





