विस्तृत उत्तर
इस चौपाई का अर्थ है — जब-जब धर्मका ह्रास (हानि) होता है और नीच (अधम) अभिमानी राक्षस (असुर) बढ़ जाते हैं (तब-तब भगवान अवतार लेते हैं)।
यह रामचरितमानस का अत्यन्त महत्वपूर्ण सिद्धान्त है जो श्रीमद्भगवद्गीता के प्रसिद्ध श्लोक 'यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत' के समान है।
इसमें अवतार के चार कारण बताये:
- 1धर्म की हानि — सनातन धर्म, वेदमार्ग और सदाचार का नाश
- 2असुरों का बढ़ना — नीच, अभिमानी और अधर्मी शक्तियों का प्रबल होना
- 3अन्याय — जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता
- 4ब्राह्मण, गौ, देवता, पृथ्वी का कष्ट — सज्जनों की पीड़ा
जब ये चारों स्थितियाँ होती हैं, तब कृपानिधान भगवान भाँति-भाँति के शरीर धारण कर (अवतार लेकर) सज्जनों की पीड़ा हरते हैं।





