विस्तृत उत्तर
मल्लिकार्जुन (श्रीशैलम्, आंध्र प्रदेश) भारत का एकमात्र स्थान जहां ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक ही स्थान पर:
विशेषता
- ▸मल्लिकार्जुन = शिव ज्योतिर्लिंग (12 में दूसरा)।
- ▸भ्रमरांबा = शक्तिपीठ (18 महाशक्तिपीठों में से एक — पार्वती का गला/ग्रीवा यहां गिरी)।
- ▸शिव + शक्ति = अर्धनारीश्वर तत्त्व का जीवंत प्रतीक।
पूजा विधि — शिव-शक्ति दोनों
- 1पहले गणेश दर्शन (मंदिर प्रवेश पर)।
- 2मल्लिकार्जुन शिवलिंग पूजा:
- ▸जलाभिषेक, पंचामृत।
- ▸बेलपत्र, श्वेत पुष्प, धतूरा।
- ▸'ॐ नमः शिवाय' जप।
- 1भ्रमरांबा देवी पूजा:
- ▸सिंदूर, लाल चुनरी, लाल पुष्प।
- ▸श्रृंगार सामग्री — चूड़ी, बिंदी, मेहंदी।
- ▸'ॐ ह्रीं श्रीं भ्रमरांबिकायै नमः' जप।
- 1दोनों की संयुक्त आरती।
लाभ
- ▸शिव (ज्ञान/मोक्ष) + शक्ति (बल/समृद्धि) = सम्पूर्ण कल्याण।
- ▸दाम्पत्य सुख विशेष — शिव-शक्ति एकता।
- ▸एक स्थान पर ज्योतिर्लिंग + शक्तिपीठ दर्शन = दोनों तीर्थ पूर्ण।
पौराणिक कथा: कार्तिकेय (क्रौंच पर्वत पर) से मिलने शिव-पार्वती श्रीशैल आए — शिव = मल्लिकार्जुन (मल्लिका = पार्वती, अर्जुन = शिव)।





