विस्तृत उत्तर
हाँ — पुराणों और शास्त्रों के अनुसार अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं। परंतु यह जीवन वरदान नहीं — एक भयंकर श्राप है।
शिव महापुराण (शतरुद्रसंहिता, अध्याय 37) के अनुसार अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं और गंगा के किनारे निवास करते हैं — परंतु उनका सटीक स्थान कहाँ है यह नहीं बताया गया।
अश्वत्थामा को आठ चिरंजीवियों में गिना जाता है — अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृप, परशुराम और मार्कण्डेय। इनमें से सभी को वरदान से जीवन मिला, परंतु अश्वत्थामा का अमरत्व श्राप से है।
कृष्ण का श्राप — उत्तरा के गर्भ पर ब्रह्मशिरास्त्र चलाने पर श्रीकृष्ण ने कहा — 'तूने द्रौपदी को जीवनभर का घाव दिया है, इसलिए तू भी इस माथे के घाव के साथ अनंत काल तक भटकेगा। मृत्यु माँगेगा पर नहीं मिलेगी। शरीर से दुर्गंध और रक्त बहता रहेगा।'
इसलिए अश्वत्थामा के अमरत्व को 'श्राप-अमरत्व' कहा जाता है — जो मुक्ति नहीं, पीड़ा का अनंत विस्तार है। कल्कि अवतार के समय उन्हें मुक्ति मिलने का उल्लेख भी कुछ ग्रंथों में मिलता है।





