विस्तृत उत्तर
कोदंड धनुष के राम जी को मिलने के विषय में पुराणों में मुख्यतः दो मत प्रचलित हैं।
पहला और अधिक प्रचलित मत — राम जी ने दंडकारण्य वन में वनवास के दौरान स्वयं इस धनुष का निर्माण किया था। दंडकारण्य एक घना और रहस्यमय वन था जो रावण के प्रभाव में था। वहाँ भील और आदिवासियों के बीच रहते हुए राम जी ने 10 वर्ष व्यतीत किए और उसी काल में उन्होंने इस दिव्य धनुष को बनाया।
दूसरा मत — यह धनुष उन्हें अयोध्या से वनवास जाते समय उनके राज्याभिषेक के लिए तैयार किए गए शस्त्रागार से प्राप्त था।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जनक के स्वयंवर में राम ने शिव का 'पिनाक' धनुष तोड़ा था जो एक अलग धनुष था — वह कोदंड नहीं था। पिनाक शिव का था, कोदंड राम जी का अपना था। इसी प्रकार परशुराम ने जो वैष्णव धनुष (शार्ङ्ग) राम को दिया वह भी कोदंड से भिन्न था।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, राम के महाप्रयाण के बाद कोदंड धनुष परशुराम को दे दिया गया था। चिरंजीवी परशुराम आज भी इस धनुष की रक्षा करते हैं।





