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पाशुपतास्त्र अर्जुन को कैसे मिला?

पाशुपतास्त्र अर्जुन को शिव ने इंद्रकील पर्वत पर स्वयं प्रकट होकर दिया था।

संक्षिप्त उत्तर

पाशुपतास्त्र अर्जुन को शिव ने इंद्रकील पर्वत पर स्वयं प्रकट होकर दिया था। अर्जुन ने घोर तपस्या की, किरात-रूपी शिव से युद्ध किया, और अंत में पूजा करने पर शिव प्रसन्न हुए।

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विस्तृत उत्तर

पाशुपतास्त्र अर्जुन को भगवान शिव ने स्वयं प्रदान किया था — यह महाभारत की एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है।

कथा इस प्रकार है — पांडव अज्ञातवास से पहले अर्जुन को युद्ध के लिए दिव्यास्त्र प्राप्त करने भेजा गया। महर्षि व्यास ने युधिष्ठिर को एक मंत्र दिया और कहा कि अर्जुन को देवताओं से अस्त्र-शस्त्र प्राप्त करने हैं। अर्जुन इंद्रकील पर्वत पर गए और भगवान शिव की घोर तपस्या आरंभ की।

तपस्या के दौरान मूक (मुकुंद) नामक असुर ने वराह का रूप धारण करके अर्जुन पर आक्रमण किया। अर्जुन ने उसे बाण मारा, परंतु उसी समय एक किरात भी उसी वराह पर बाण चला रहा था। किरात और अर्जुन में वराह को मारने का श्रेय लेने पर झगड़ा हुआ। दोनों में युद्ध हुआ — अर्जुन के सभी बाण, फिर गांडीव, फिर तलवार — सब व्यर्थ हो गए।

तब अर्जुन ने अनुमान लगाया कि यह किरात साधारण नहीं है। उन्होंने शिव की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा की — वह माला किरात के गले में चली गई। तब शिव ने अपना असली रूप प्रकट किया और अर्जुन की तपस्या और साहस से प्रसन्न होकर पाशुपतास्त्र प्रदान किया।

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