विस्तृत उत्तर
पाशुपतास्त्र और ब्रह्मास्त्र दोनों त्रिदेवों के महास्त्र हैं — दोनों की तुलना करना अत्यंत गूढ़ प्रश्न है। फिर भी पुराणों में कुछ संकेत मिलते हैं।
ब्रह्मास्त्र — ब्रह्माजी का सर्वोच्च अस्त्र। यह जहाँ भी चले, 12 वर्षों तक अकाल पड़ता है। इसका प्रतिकार केवल दूसरा ब्रह्मास्त्र कर सकता है। रामायण और महाभारत दोनों में इसे सर्वाधिक प्रयुक्त महाशक्तिशाली अस्त्र बताया गया है।
पाशुपतास्त्र — भगवान शिव का सर्वोच्च अस्त्र। पुराणों में कुछ स्थानों पर इसे ब्रह्मास्त्र से भी अधिक शक्तिशाली बताया गया है। इसे मन, वाणी, नेत्र और धनुष — चारों से चलाया जा सकता था। तीनों लोकों में कोई भी प्राणी इससे नहीं बच सकता था। एक संदर्भ में कहा गया है कि पाशुपतास्त्र ब्रह्मास्त्र को निगल सकता है।
इसलिए — पाशुपतास्त्र को ब्रह्मास्त्र से अधिक शक्तिशाली माना जाता है। परंतु यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि पाशुपतास्त्र और ब्रह्मशिरास्त्र को अक्सर समतुल्य या समान श्रेणी में रखा जाता है। ब्रह्मशिरास्त्र सामान्य ब्रह्मास्त्र से चार गुना अधिक शक्तिशाली है — और पाशुपतास्त्र उससे भी अधिक।





