विस्तृत उत्तर
श्रीराम ने सीता के स्वयंवर में भगवान शिव का दिव्य धनुष 'पिनाक' तोड़ा था। यह महाभारत में वर्णित है और रामायण परंपरा का सर्वाधिक प्रचलित प्रसंग है।
वाल्मीकि रामायण के अनुसार राजा जनक ने सीता स्वयंवर का आयोजन किया था जिसमें यह शर्त थी कि जो राजकुमार इस शिव धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा, उसी से सीता का विवाह होगा। यह धनुष इतना विशाल और भारी था कि दुनिया के महान शक्तिशाली राजा भी इसे हिला नहीं सके थे — यहाँ तक कि रावण भी इसे उठाने में असफल रहा।
पिनाक धनुष राजा जनक के पूर्वज देवरथ को देवताओं ने दिया था। मान्यता है कि यह धनुष स्वयं शिव जी ने बनाया था और त्रिपुरासुर के वध में इसका प्रयोग किया था।
रामचरितमानस के अनुसार गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम शांत भाव से उठे, पिनाक को प्रणाम किया और सहज रूप से उसे उठा लिया। प्रत्यंचा चढ़ाते समय धनुष भयंकर गर्जना के साथ टूट गया। इसी प्रसंग के बाद श्रीराम और सीता का विवाह सम्पन्न हुआ।





