विस्तृत उत्तर
चंद्रहास तलवार रावण को भगवान शिव से उनकी भक्ति के फल स्वरूप मिली थी। यह एक अत्यंत प्रसिद्ध कथा है।
कथा के अनुसार एक बार रावण अपने पुष्पक विमान से उत्तर दिशा में जा रहा था। मार्ग में कैलाश पर्वत आने से विमान आगे नहीं बढ़ सका। अहंकार में चूर रावण ने विमान से उतरकर पूरे कैलाश पर्वत को ही हटाने के लिए उसे उठाने का प्रयास किया। पर्वत डगमगाने लगा। तब भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से हल्का सा दबाव दिया और कैलाश फिर स्थिर हो गया जिससे रावण का हाथ दब गया।
रावण ने तीव्र पीड़ा में 'शंकर शंकर' का उच्चारण करते हुए क्षमा माँगी। शिव को मनाने के लिए रावण ने अपने दस सिरों में से एक-एक काटकर हवन में डालने लगा। जैसे ही वह दसवाँ सिर काटने वाला था, शिव प्रकट हुए और उसकी परम भक्ति से प्रसन्न हुए। इसी समय रावण ने अनेक वरदानों के साथ चंद्रहास तलवार माँगी। शिव ने उसे यह दिव्य तलवार प्रदान की — साथ में चेतावनी दी कि इसका दुरुपयोग होने पर यह वापस लौट जाएगी।





