विस्तृत उत्तर
कृत्तिकाओं द्वारा कार्तिकेय को दूध पिलाने की कथा पुराणों में अत्यंत मार्मिक और दिव्य रूप में वर्णित है।
जब शिव जी के दिव्य तेज से छह शिशु शरवण वन में कमल के फूलों पर प्रकट हुए और रोने लगे, तब उनका रुदन सुनकर कृत्तिका नक्षत्र की छह देवियाँ वहाँ उतरीं। ये देवियाँ सप्तर्षियों (जो कार्तिकेय के प्रकट होने के समय आकाश में थे) की पत्नियाँ मानी जाती हैं। कुछ मान्यताओं के अनुसार इन छह कृत्तिकाओं के नाम शिवा, संभूति, प्रीति, सन्नति, अनसूया और क्षमा थे।
जब उन देवियों की दृष्टि उन नन्हे बालकों पर पड़ी, तो उनके मन में तीव्र मातृत्व-भाव जागा। वे प्रेम से भर गईं और उन्होंने एक-एक बालक को अपने वक्ष से लगाकर स्तनपान कराया — इस प्रकार छह कृत्तिकाओं ने छह बालकों को एक साथ अपना दूध पिलाया।
इसी कारण इन बालकों का नाम 'कार्तिकेय' पड़ा — अर्थात कृत्तिकाओं का पुत्र। संस्कृत में 'कार्तिकेय' का अर्थ ही है कृत्तिका-पुत्र। यही कारण है कि कार्तिकेय की छह माताएँ मानी जाती हैं और वे षड्मुख (छह मुखों वाले) हैं — प्रत्येक मुख एक-एक कृत्तिका माता का प्रतीक है।
