विस्तृत उत्तर
शिव पुराण और लोक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने निराहार रहकर और बेलपत्र का सेवन करके शिव की आराधना की थी जिसे सोमवार व्रत का आदि स्वरूप माना जाता है। माता पार्वती द्वारा की गई यह साधना अविवाहित कन्याओं के लिए आदर्श बन गई। शास्त्रों में फलश्रुति के अनुसार, यह व्रत सुयोग्य जीवनसाथी (मनोवांछित वर) की प्राप्ति के लिए अमोघ माना गया है।
