शिव तत्त्वशिव सृष्टि, पालन और संहार कैसे करते हैं?महादेव ने कहा कि वे निष्कल परमेश्वर ही ब्रह्मा, विष्णु और भव रूपों में सृजन, पालन और संहार से युक्त हैं।#सृष्टि#पालन#संहार
शिव तत्त्वशिव के तीन रूप कौन से हैं?निष्कल परमेश्वर शिव ब्रह्मा, विष्णु और भव नामों से तीन रूपों में सृजन, पालन और संहार के गुणों से युक्त हैं।#शिव के तीन रूप#ब्रह्मा#विष्णु
सृष्टि-पालन-संहारशिव सृष्टि, पालन, संहार कैसे करते हैं?शिव को जल के मध्य स्थित, ब्रह्मा-विष्णु के मध्य प्रकाशमान, सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता, संहारकर्ता और मृत्युस्वरूप ईश्वर कहा गया है।#सृष्टि#पालन#संहार
शिव तत्त्वमहेश्वर रजोगुण सत्त्वगुण और तमोगुण से कैसे जुड़े हैं?महेश्वर सृष्टि में रजोगुण, पालन में सत्त्वगुण और प्रलय में तमोगुण से जुड़े बताए गए हैं।#महेश्वर#रजोगुण#सत्त्वगुण
शिव तत्त्वमहेश्वर सृष्टि पालन और संहार कैसे करते हैं?महेश्वर तीन रूपों में होकर सृष्टि, पालन और संहार करते हैं।#महेश्वर#सृष्टि#पालन
सृष्टि तत्त्वविष्णु से जगत की रक्षा कैसे होती है?तीन प्रधान देवों में विष्णु से जगत् की रक्षा होती है और पालन की स्थिति सत्त्वगुण से जुड़ी बताई गई है।#विष्णु#जगत रक्षा#पालन
शिव तत्त्वशिव लिंग रूप क्यों धारण करते हैं?महेश्वर शिव सृष्टि, पालन और संहाररूप लीला के लिए लिङ्गस्वरूप धारण करते हैं।#शिव#लिंग रूप#महेश्वर
गृहस्थ धर्मगृहस्थ अहिंसा पालन कैसेशारीरिक (शाकाहार/कीट), वाचिक (कटु वचन=हिंसा), मानसिक (ईर्ष्या/द्वेष)। 100%=असंभव; अधिकतम प्रयास=पर्याप्त। अधर्म रोकना=धर्म (गीता)।#अहिंसा#गृहस्थ#पालन
दैनिक आचारमृत्यु सूतक में क्या नियम पालन करें13 दिन: पूजा/मंदिर/शुभ कार्य वर्जित। मानसिक जप अनुमत। सादा भोजन, मांसाहार/मदिरा/उत्सव बंद। 13वें दिन शुद्धि + तेरहवीं। विस्तार: प्रश्न 465-466।#मृत्यु सूतक#नियम#अशौच
कार्तिकेय कथाकार्तिकेय का पालन-पोषण किसने किया था?कार्तिकेय का पालन-पोषण मुख्यतः कृत्तिका नक्षत्र की छह देवियों ने किया जिन्होंने उन्हें स्तनपान कराया। इसीलिए वे 'कार्तिकेय' कहलाए। इसके अतिरिक्त गंगा, अग्निदेव और माता पार्वती भी उनकी मातृशक्तियाँ मानी जाती हैं।#कार्तिकेय#कृत्तिकाएं#षण्मुख
आधुनिक धर्म प्रश्नविदेश में रहकर हिंदू धर्म पालन कैसे करें?घर मंदिर(5 मिनट), दैनिक जप, त्योहार मनाएँ, /मंदिर खोजें, गीता 1 श्लोक/दिन, ऑनलाइन सत्संग, बच्चों को कहानियाँ। धर्म=आचरण+भक्ति, स्थान नहीं। विदेश=बहाना नहीं।#विदेश#NRI#हिंदू धर्म