विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में भूलोक अथवा भू-मण्डल के आकार की तुलना एक विशाल खिले हुए कमल-पत्र से की गई है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार जम्बूद्वीप उत्तर और दक्षिण दिशा की ओर से कुछ दबा हुआ है तथा मध्य भाग में यह अत्यंत विस्तृत और उभरा हुआ है जिससे इसकी समग्र आकृति एक खिले हुए कमल के चार पत्तों जैसी प्रतीत होती है। यह तुलना केवल आकार की नहीं है अपितु इसका गहरा प्रतीकात्मक अर्थ भी है। जिस प्रकार कमल कीचड़ में उगकर भी शुद्ध और पवित्र रहता है उसी प्रकार भूलोक माया और संसार के बीच होते हुए भी जीव के लिए मोक्ष का मार्ग प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त जम्बूद्वीप के केंद्र में सुमेरु पर्वत की स्थिति कमल की कर्णिका (केंद्रीय भाग) के समान है जबकि चारों ओर के नव-वर्ष उसकी पंखुड़ियों के समान हैं। भू-मण्डल का यह कमल-स्वरूप ब्रह्माण्ड की गणितीय और सौंदर्यपरक संरचना का दिव्य प्रकटीकरण है।
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