विस्तृत उत्तर
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अन्य वर्षों के निवासियों को बिना कर्म किए ही छह प्रकार की सिद्धियाँ स्वतः प्राप्त हो जाती हैं। ये छह सिद्धियाँ इस प्रकार हैं — वृक्षों से (प्राकृतिक रूप से वृक्ष सभी आवश्यकताएं पूरी करते हैं), स्वभाव से (स्वाभाविक रूप से शक्तियाँ प्राप्त होती हैं), भूमि से (भूमि स्वयं सभी फल-फूल प्रदान करती है), जल से (जल स्वयं समस्त पोषण देता है), ध्यान से (ध्यान से ही सिद्धियाँ मिलती हैं) और धर्म से (धर्माचरण से स्वतः सिद्धियाँ आती हैं)। यह इन वर्षों की भोगभूमि प्रकृति को दर्शाता है जहाँ पुण्यात्माएं अपने पूर्वजन्म के पुण्यों का भोग बिना प्रयास के करती हैं। किन्तु भारतवर्ष में ऐसा नहीं है — यहाँ परम तपस्वी ऋषि घोर तपस्या करते हैं, भक्तजन यज्ञ करते हैं और दान-पुण्य के माध्यम से परलोक संवारते हैं। यही भारतवर्ष की कर्मभूमि होने की विशेषता है।
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