विस्तृत उत्तर
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, विभिन्न देवताओं के तेज से देवी के विशिष्ट अंगों का निर्माण हुआ:
— भगवान शिव के तेज से देवी के मुख का निर्माण हुआ
— यमराज की शक्ति से उनके केशों का
— भगवान विष्णु के तेज से उनकी दस भुजाओं का
— चंद्रमा के तेज से दोनों स्तनों का
— इन्द्र के तेज से मध्य भाग का
— वरुण के तेज से जंघाओं और पिंडलियों का
— पृथ्वी के तेज से नितंबों का
— ब्रह्मा जी की शक्ति से उनके चरणों का निर्माण हुआ
इस प्रकार, संपूर्ण ब्रह्मांड की ऊर्जा, चेतना और तेज एक ही स्वरूप में संघनित होकर 'माँ दुर्गा' कहलाईं।





