विस्तृत उत्तर
सप्तर्षियों ने पार्वतीजी की परीक्षा लेने के लिये शिवजी के बारे में अनेक बुराइयाँ गिनाईं:
दोहा — 'महादेव अवगुन भवन बिष्नु सकल गुन धाम' — महादेव अवगुणों का घर हैं जबकि विष्णु सद्गुणों के धाम।
फिर बताया — शिवजी निर्गुण (गुणरहित), निलज (निर्लज्ज), कुबेष (कुवेषधारी — भस्म, साँप, खोपड़ी माला), अकुल (कुलहीन — कोई कुल-वंश नहीं), अगेह (बेघर — श्मशान में रहते हैं), दिगम्बर (नग्न) हैं।
साथ ही कहा — 'उदासीन सब संसय छीना' — वे उदासीन हैं, सबसे विरक्त।
परन्तु ये सब बातें परीक्षा के लिये थीं — असल में ये सब शिवजी की वैराग्य-महिमा के लक्षण हैं, दोष नहीं। सप्तर्षि जानना चाहते थे कि पार्वतीजी इतना सुनकर भी अपने संकल्प पर अडिग रहती हैं या नहीं।





