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विस्तृत उत्तर
तर्पण में गोत्र और नाम इसलिए बोला जाता है क्योंकि वे विशिष्ट जीवात्मा के परिचायक या पते का कार्य करते हैं। नन्द पण्डित के अनुसार 'देवदत्त' आदि नाम उस विशेष जीवात्मा के Identifier या Address हैं, जबकि वसु, रुद्र और आदित्य उन जीवात्माओं के अधीक्षक देव हैं। जब यजमान गोत्र और नाम का उच्चारण करके वसु-रुद्र-आदित्य स्वरूप कहकर तर्पण करता है, तो ये ब्रह्माण्डीय देव उस संकल्प रूपी सूक्ष्म तंत्र के माध्यम से तृप्ति को उस विशिष्ट आत्मा तक पहुँचा देते हैं।
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