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विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु का समय निकट आने पर भूमि पर गोमय, अर्थात गाय के गोबर, का लेपन करना चाहिए। इसके ऊपर कुशा बिछाकर मरणासन्न व्यक्ति को स्थापित किया जाता है। यह विधान मृत्यु के समय शरीर को भूमि पर रखने, देह की पवित्रता और पारलौकिक शुद्धता सुनिश्चित करने से जुड़ा है। शास्त्रों में शय्या या खाट पर प्राण त्यागना वर्जित बताया गया है, इसलिए गोमय-लेपित भूमि और कुशा का विधान किया गया है।
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