विस्तृत उत्तर
मृत्यु के समय आत्मा लिंग शरीर या सूक्ष्म शरीर में आवेष्टित होकर स्थूल शरीर का परित्याग करती है। यह लिंग शरीर पूर्वजन्म के कर्मों और संस्कारों का वाहक होता है। मृत्यु के तत्काल पश्चात आत्मा वायुजा देह धारण करती है, जो वायव्य स्वरूप की होती है। पहले दस दिनों में पिण्डदान से उसके लिए पिण्डज शरीर का निर्माण होता है। यदि जीव पापी है, तो यममार्ग और नरक के कष्टों को सहने के लिए उसका पिण्डज शरीर यातना देह में परिवर्तित किया जा सकता है।
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